री-नीट का दबाव: कोटा में छात्रों के साथ माता-पिता भी दे रहे परीक्षा, हर कमरे में तनाव और उम्मीद की कहानी

Pressure of Re-NEET In Kota, parents are taking the exam alongside students; every room holds a story of tension and hope.

नई दिल्ली: राजस्थान का कोटा शहर एक बार फिर मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को लेकर चर्चा में है। 21 जून को होने वाली री-नीट परीक्षा से पहले यहां का माहौल तनाव, उम्मीद और अनिश्चितता से भरा हुआ है। पेपर लीक विवाद के बाद दोबारा परीक्षा की घोषणा ने हजारों छात्रों और उनके परिवारों को मानसिक दबाव के दौर में ला खड़ा किया है।

कोटा की कोचिंग गलियों में सुबह से देर रात तक पढ़ाई का माहौल दिखाई देता है। हॉस्टलों, पीजी और किराए के कमरों में छात्र किताबों और टेस्ट सीरीज में जुटे हैं। लेकिन इस बार सिर्फ छात्र ही नहीं, उनके माता-पिता भी इस संघर्ष का हिस्सा बन गए हैं। कई परिवार अपने बच्चों का मनोबल बनाए रखने के लिए कोटा में उनके साथ रह रहे हैं।

कानपुर के रहने वाले 19 वर्षीय उत्कर्ष भी उन्हीं छात्रों में शामिल हैं जो मेडिकल कॉलेज में दाखिले का सपना लेकर कोटा आए थे। पहली परीक्षा के बाद उन्हें उम्मीद थी कि कट-ऑफ काफी ऊंची जाएगी। फिर पेपर लीक विवाद और परीक्षा रद्द होने की खबर ने उनकी चिंता बढ़ा दी। अब री-नीट के लिए वह दोबारा तैयारी कर रहे हैं। उनके साथ उनकी मां भी कोटा में रह रही हैं और पढ़ाई के लिए अनुकूल माहौल बनाने में जुटी हैं।

उत्कर्ष की मां का कहना है कि उनका पूरा दिन बेटे की पढ़ाई के अनुसार तय होता है। घर के कामकाज से लेकर भोजन और दिनचर्या तक सब कुछ इस तरह व्यवस्थित किया जाता है ताकि बेटे का पूरा ध्यान सिर्फ पढ़ाई पर रहे। री-नीट की घोषणा के बाद छात्रों को फिर से उसी मानसिक दबाव से गुजरना पड़ रहा है जिसे वे पीछे छोड़ चुके थे।

ऐसी ही कहानी 18 वर्षीय विदुषी और उनकी मां की भी है। दोनों एक छोटे से हॉस्टल कमरे में रह रही हैं, जहां हर कोना किताबों और पढ़ाई के सामान से भरा हुआ है। विदुषी की मां का कहना है कि पिछले दो वर्षों में छात्रों ने काफी मानसिक दबाव झेला है और पेपर लीक विवाद ने उनकी चिंताओं को और बढ़ा दिया है।

कोटा में बड़ी संख्या में ऐसे माता-पिता मौजूद हैं जो अपने बच्चों को अकेला छोड़ने के बजाय उनके साथ रहना बेहतर समझते हैं। उनका मानना है कि कठिन प्रतियोगी माहौल में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक संतुलन के लिए परिवार का साथ बेहद जरूरी है। कई अभिभावक बच्चों के व्यवहार और मनोदशा पर लगातार नजर रख रहे हैं ताकि किसी भी तरह की परेशानी को समय रहते समझा जा सके।

विशेषज्ञों के अनुसार, परीक्षा रद्द होने और दोबारा आयोजित होने की प्रक्रिया ने छात्रों में तनाव, अनिद्रा, चिंता और आत्मविश्वास में कमी जैसी समस्याएं बढ़ाई हैं। कई परिवारों के लिए परीक्षा की तैयारी से ज्यादा चुनौती बच्चों को भावनात्मक रूप से संभालना बन गई है।

इस बीच कोटा के कोचिंग संस्थानों ने री-नीट को ध्यान में रखते हुए फास्ट-ट्रैक रिवीजन, मॉक टेस्ट और विशेष अभ्यास कार्यक्रम शुरू कर दिए हैं। संस्थान छात्रों को अंतिम दिनों में बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयार करने में जुटे हैं।

री-नीट 2026 का आयोजन 21 जून को होना है। सरकार और परीक्षा एजेंसियों ने इस बार परीक्षा को पूरी तरह निष्पक्ष और त्रुटिरहित बनाने का भरोसा दिया है। हालांकि छात्रों और अभिभावकों के मन में अभी भी कई सवाल बने हुए हैं। ऐसे में कोटा के हजारों कमरों में सिर्फ पढ़ाई नहीं, बल्कि सपनों, संघर्ष और उम्मीदों की एक समानांतर कहानी भी लिखी जा रही है।

ये खबरें भी अवश्य पढ़े

Leave a Comment